थका सूरज ,
अभी अभी
क्षितिज पे जाके टंग गया,
पसीना उसका
लहू बनकर ,
सागर को लाल कर गया,
पूछा मैंने
क्या मिला तुम्हे
इस तरहा
आग बरसाकर,
लम्बी ख़ामोशी
फिर बोला मुस्कुराकर
तुम न समझोगे...
तपना पड़ता है
आम को भी
मीठा होने के लिए.
तुम तो
आदमी हो ...© Amar Singh Tanwar.

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