सुन बे मौसम
बहुत हुआ
तूने भी
छल किया
तेरे लिए
दिन रात भीगा
अशआर लिखे
गीत लिखे
स्वाभाव से विपरीत
चिरौरी की
तेरी नालायक
और तू
नामुराद
कहता था
मेरा कमाल देखना
पिघला कर
बहा ले आऊंगा उनको
जमाल देखना
ज़ज्बात सूखे
अहसास सूखे
वो सूखे
हम सूखे
किया क्या तूने
अब तक ?
सुन ..
आज से
बंद कर दे
खुद को कहलाना
मेघदूत.................@ अमर सिंह तंवर(११.०७.२०१३).
बेईमान कहीं का......"बे"मौसम ही आ जायेंगे वो देखना...
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