एक ख्वाब था अधुरा सा
कोई गुज़रे दिल की राहों में.
जाज़िब है ज़ज्बा-ए-मुहब्बत
क्यों डुबोना दिल को आहों में
हम भी कभी बैठें फुर्सत से
ए मुहब्बत तेरी पनाहों में.
कुछ ख्वाब मुख़्तसर देखें हैं
जिंदगी हमने तेरी निगाहों में.
इलज़ाम "अमर" हम सर लेंगे
है नाम-ए-मुहब्बत गर गुनाहों में
__________@अमर सिंह तंवर.
जज़्बा= आवेश, आवेग
जाज़िब= मनमोहक, आकर्षक
वाह बहुत खूब
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