नजरें झुका लेती वो,
जब भी उसकी,
आँखों में हूँ झांकता।
जाने क्यूँ वो शक्श मुझे,
कभी पराया नहीं लगता।
दिल चुराता है उनका,
देख कर नहीं देखना।
लबों को बंद कर,
आँखों से सब कहना।
अनाम रिश्ते का,
दरमियाँ महकना।
तनहा रातों में जैसे,
हरसिंगार का खिलना।
तनहाइयों के अश्क,
सुबहा ओस से दमकते हैं.
क्या हुआ जो कहा नहीं,
वो हमारे और हम उनके,
दिल में रहते है मन में बसते हैं !!!……@अमर।


