धरा का नृत्य
शाम रंगों से सरोबार
रुपहला आसमां
घर लौटते
पंछियों का कलरव
कब देखा था ?
आखिरी बार...
याद नहीं अब
ढलते ही शाम
लेने लगते है रूप
मेरे डर,अवसाद मेरे.
नाचने लगते है
पहले हलके फिर
तेज़ और तेज़.
ढूँढने लगता हू मैं
और गहरा रंग,
या स्याह कालिख.......अमर © (19.02.2013)
शाम रंगों से सरोबार
रुपहला आसमां
घर लौटते
पंछियों का कलरव
कब देखा था ?
आखिरी बार...
याद नहीं अब
ढलते ही शाम
लेने लगते है रूप
मेरे डर,अवसाद मेरे.
नाचने लगते है
पहले हलके फिर
तेज़ और तेज़.
ढूँढने लगता हू मैं
और गहरा रंग,
या स्याह कालिख.......अमर © (19.02.2013)
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