Wednesday, 20 February 2013

धरा का नृत्य 
शाम रंगों से सरोबार 
रुपहला आसमां
घर लौटते 
पंछियों का कलरव 
कब देखा था ?
आखिरी बार...
याद नहीं अब
ढलते ही शाम
लेने लगते है रूप
मेरे डर,अवसाद मेरे.
नाचने लगते है
पहले हलके फिर
तेज़ और तेज़.
ढूँढने लगता हू मैं
और गहरा रंग,
या स्याह कालिख.......अमर © (19.02.2013)

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