मायने रखता है
बस महसूस करना..
कल्पना और यथार्थ
की महीन रेखा में
डूबती उतराती है
आभास की तीव्रता तब
जाने कहा खो जाती है
जमीनी दूरिया और
बन जाती है आइना
ये आभासी दीवार....(अमर).
बस महसूस करना..
कल्पना और यथार्थ
की महीन रेखा में
डूबती उतराती है
आभास की तीव्रता तब
जाने कहा खो जाती है
जमीनी दूरिया और
बन जाती है आइना
ये आभासी दीवार....(अमर).
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