रोटी की एकरूपता टूटी
एकरस थी रोटी बिना कोनो के
और बन गए परांठे
कुछ चोकोर कुछ तिकोने
कुछ परते बना ली खुद में
उन की परतो के होम चढ़ गया
दूधमुहों का दूध, घी बनकर
और रोटी अब भी बनती है गोल
वृत्त की तरहा,कुनबे को समेटे .....अमर (20.02.2013)
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