सुनो ए रंगबिरंगी
खुशियों में फुदकती चिड़िया,
तुम गा नहीं सकती,
एक डाल से दूसरी डाल
बेखौफ जा नहीं सकती..
क्या हुआ जो खिलते है फूल
गाने से तुम्हारे,
मौसम बलाए लेता है
गाने से तुम्हारे..
और हां ये चमकदार रंगों को
छुपा कर रखा करो ,
काले लिबास में.
चाहे हो जाये इंसानियत काली,
जब हम ही बन जाये वहशी,
काली परत चढ़ी बस की रफ़्तार में .
और ये बंद करो तुम्हारी
ऊँची ऊँची उड़ाने..
होता नहीं बर्दाश्त हमसे ,
हमसे ऊँचा उड़ना तुम्हारा.
और सुनो रंग बिरंगी चिड़िया
कैसे उड़ लेती हो आखिर ..?
नहीं भूलते हम कतरना
पंख तुम्हारे,
कभी धर्म तो कभी समाज की
दोधारी केंचियों से,
सुन ओ रंगबिरंगी चिड़िया
अब नहीं गाओगी तुम
बस कह दिया सो
कह दिया हमने...
सुन ओ रंगबिरंगी चिड़िया
अब नहीं गाओगी तुम
बस कह दिया सो
कह दिया हमने...
अमर.. Copyright ©.. दिनांक 10.02.2013.
खुशियों में फुदकती चिड़िया,
तुम गा नहीं सकती,
एक डाल से दूसरी डाल
बेखौफ जा नहीं सकती..
क्या हुआ जो खिलते है फूल
गाने से तुम्हारे,
मौसम बलाए लेता है
गाने से तुम्हारे..
और हां ये चमकदार रंगों को
छुपा कर रखा करो ,
काले लिबास में.
चाहे हो जाये इंसानियत काली,
जब हम ही बन जाये वहशी,
काली परत चढ़ी बस की रफ़्तार में .
और ये बंद करो तुम्हारी
ऊँची ऊँची उड़ाने..
होता नहीं बर्दाश्त हमसे ,
हमसे ऊँचा उड़ना तुम्हारा.
और सुनो रंग बिरंगी चिड़िया
कैसे उड़ लेती हो आखिर ..?
नहीं भूलते हम कतरना
पंख तुम्हारे,
कभी धर्म तो कभी समाज की
दोधारी केंचियों से,
सुन ओ रंगबिरंगी चिड़िया
अब नहीं गाओगी तुम
बस कह दिया सो
कह दिया हमने...
सुन ओ रंगबिरंगी चिड़िया
अब नहीं गाओगी तुम
बस कह दिया सो
कह दिया हमने...
अमर.. Copyright ©.. दिनांक 10.02.2013.
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