उम्मीद के सिमटें परों को जरा,
तबियत से फैला के तो देखिये !!
छु लोगे यकीनन एक दिन आसमां,
नज़रों को ऊपर उठा के तो देखिये !!
कब तक छुपेगी काबिलियत तुमसे,
बंद होंसलों को ज़रा,आजमा के तो देखिये!!
कहते रहतें है लोग तो सदियों से,
खुद अपनी राह बना के तो देखिये!!
शिखर पर "अमर"होती है जगह कम,
एक बार अपनी जगह बना के तो देखिये!!
_________________@ अमरसिंह तंवर(15.06.2013)
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