Monday, 3 June 2013

यहीं कहीं है .

कहती है तुझे छूकर आती हवा,
मेरे अहसास अब तक वहीँ है
अब भी कहता हूँ थाम लो पलों को,
वक़्त किसी के लिए रुकता नहीं है.

न तुम जी पा रही हो,न मैं यहाँ,
दिल है कहीं  दिमाग कहीं है ,
जिस्म बस लेता है सांसे ,
जिन्दगी की झलक कहीं नहीं है

किसको है झुकना ,कौन खफा हुआ
इन बातों का कोई मतलब नहीं है
आज भी ये कहता है दिल
दूर नहीं तू यही कहीं है ...यहीं कहीं है .
_______Copyright अमर सिंह तंवर .

No comments:

Post a Comment