विश्व पर्यावरण दिवस पर सप्रेम ...
पारदर्शी कलेवर में लिपटे ,
निर्जीव फूल
अक्सर बनते है शोभा
हर अवसर की ,
मुस्कुराते चेहरे
आदान प्रदान करते
दुआओं के साथ ...
सार्थक हो जाती
यकीनन दुआएं
गर देने लगें लोग ,
एक नन्हा पौधा
सजीव,संभावनाओं
से भरपूर,
महकते रहेंगे रिश्ते,
ताउम्र ,पीढ़ी दर पीढ़ी
जब जब आयेंगे
फूल,या लदेंगा फलों से
आपका दिया
संभावनाओ भरा
सजीव उपहार.
मुस्कुरायेंगी
वसुंधरा
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बहुत सुन्दर.....
ReplyDeleteगुनगुनाती मुस्कुराती वसुंधरा....
अनु