Saturday, 25 May 2013

एतबार





गुलों को देखा जो खिलते ,
तेरे चेहरे पे एतबार आ गया,

देख कर रंगत सुर्ख गुलाबों की,
तेरे रुखसारों पे एतबार आ गया,

भीगे मौसम में छाई काली घटा,
तेरे गेसुओं पे एतबार आ गया.

दूर कहीं  फिर कोयल कूकी,
तेरी आवाज़ पे एतबार आ गया,

बैठा रहा था झील किनारे,
तेरी आँखों पे एतबार आ गया,

दरिया सी तेरी सीरत देखी,
खुदा की खुदाई पे एतबार आ गया...-© अमर सिंह तंवर

No comments:

Post a Comment