Thursday, 23 May 2013

थका सूरज







थका सूरज ,
अभी अभी 
क्षितिज पे जाके टंग गया,
पसीना उसका
लहू बनकर ,
सागर को लाल कर  गया,

पूछा मैंने 
क्या मिला तुम्हे 
इस तरहा
आग बरसाकर,

लम्बी  ख़ामोशी 
फिर बोला मुस्कुराकर 
तुम न समझोगे...
तपना पड़ता है 
आम  को भी 
मीठा होने के लिए.
तुम तो 
आदमी हो ...© Amar Singh Tanwar.

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