मन मुसाफिर ठिठका है जिन ठिकानो पर...बस वही की बानगी नज़र करता हूँ ......मेरे शब्दों में कुछ द्रश्य ....
Saturday, 25 May 2013
मन मुसाफिर : फसाना
मन मुसाफिर : फसाना: मेरी खामोशियों में भी फसाना ढूंढ लेती है, बड़ी शातिर है ये दुनिया बहाना ढूंढ लेती है. हकीकत जिद किए बैठी है चकनाचूर करने को, मगर हर आंख...
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