Saturday, 25 May 2013

मन मुसाफिर : एतबार

मन मुसाफिर : एतबार: गुलों को देखा जो खिलते , तेरे चेहरे पे एतबार आ गया, देख कर रंगत सुर्ख गुलाबों की, तेरे रुखसारों पे एतबार आ गया, भीगे मौसम में छाई ...

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