Thursday, 23 May 2013

फसाना


मेरी खामोशियों में भी फसाना ढूंढ लेती है,

बड़ी शातिर है ये दुनिया बहाना ढूंढ लेती है.

हकीकत जिद किए बैठी है चकनाचूर करने को,

मगर हर आंख फिर सपना सुहाना ढूंढ लेती है..© अमर.

1 comment:

  1. बहुत सुन्दर...
    ख्वाब बड़े जिद्दी होते हैं......

    अनु

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